भाजपा के कुछ कार्यकर्ता शिवसेना को कमजोर कर रहे हैं, यह गठबंधन के लिए ‘धीमा जहर’ : अब्दुल सत्तार

शिंदे गुट के विधायक ने जिला स्तर पर शिवसेना को नुकसान पहुंचाने का लगाया आरोप; एकनाथ शिंदे के फिर मुख्यमंत्री बनने की संभावना भी जताई

मुंबई : शिवसेना विधायक अब्दुल सत्तार ने भाजपा के कुछ स्थानीय कार्यकर्ताओं पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वे जिला स्तर पर शिवसेना को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने इस स्थिति को गठबंधन के लिए “धीमा जहर” बताते हुए कहा कि इससे महायुति सरकार के सहयोगी दलों के बीच असंतोष बढ़ सकता है।

अब्दुल सत्तार ने कहा कि भाजपा और शिवसेना गठबंधन सहयोगी हैं तथा राज्य के मुख्यमंत्री भी भाजपा से हैं। इसके बावजूद जिला स्तर पर भाजपा के कुछ कार्यकर्ता शिवसेना को दरकिनार कर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने में लगे हैं। उन्होंने कहा कि सहयोगी दलों को साथ लेकर चलने के बजाय शिवसेना के संगठनात्मक आधार को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने कहा, “हम भाजपा के सहयोगी हैं, विरोधी नहीं। ऐसे में जिला स्तर पर जो कुछ हो रहा है, उस पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। भाजपा के कुछ कार्यकर्ता शिवसेना को नुकसान पहुंचाने में लगे हैं, जो गठबंधन की भावना के अनुरूप नहीं है।”

सत्तार ने आरोप लगाया कि महानगरपालिकाओं, जिला परिषदों, नगरपालिकाओं और अन्य स्थानीय निकायों में, जहां पहले शिवसेना का प्रभाव था, वहां भाजपा ने अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। उन्होंने कहा कि सत्ता का उपयोग जनहित और गठबंधन को मजबूत करने के लिए होना चाहिए, न कि सहयोगी दल को कमजोर करने के लिए।

पिछले 18 महीनों में बदली धारणा

अब्दुल सत्तार ने कहा कि सत्ता के शुरुआती वर्षों में उन्हें ऐसी स्थिति का अहसास नहीं हुआ था। जब एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री थे, तब इस तरह की बातें सामने नहीं आई थीं। हालांकि पिछले 18 महीनों के दौरान उन्होंने कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं के व्यवहार में बदलाव महसूस किया है।

उन्होंने कहा, “पिछले 18 महीनों में जो रवैया और कार्यशैली देखने को मिली है, वह उचित नहीं है। हालांकि चुनाव संबंधी संगठनात्मक निर्णयों और निर्देशों का पालन किया जाएगा।”

फडणवीस और शिंदे से हस्तक्षेप की मांग

सत्तार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे से इस मुद्दे को गंभीरता से लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि गठबंधन की मजबूती बनाए रखने के लिए इस विषय पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि एकनाथ शिंदे के फैसलों और बयानों का व्यापक राजनीतिक प्रभाव पड़ता है। उनके अनुसार, “जब एकनाथ शिंदे कोई बड़ा निर्णय लेते हैं, तो उसके दूरगामी परिणाम दिखाई देते हैं।”

शिंदे फिर बन सकते हैं मुख्यमंत्री

अब्दुल सत्तार ने दावा किया कि भविष्य में एकनाथ शिंदे एक बार फिर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि ढाई वर्ष बाद राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार ऐसा संभव हो सकता है।

उन्होंने कहा, “मातोश्री का नेतृत्व उद्धव ठाकरे के हाथ में है, जबकि हमारी पार्टी का नेतृत्व और नियंत्रण एकनाथ शिंदे के हाथ में है। राजनीति में भविष्य को लेकर अभी कुछ भी निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता। जिस तरह कभी यह कल्पना नहीं की गई थी कि उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एक साथ आ सकते हैं, उसी तरह राजनीति में आगे भी कई अप्रत्याशित घटनाक्रम संभव हैं।”

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