चेक बाउंस मामले में अभिनेता राजपाल यादव को जेल में करना पड़ा आत्मसमर्पण

मुंबई : चेक देकर रुपए न देने या फिर टालमटोल करने की मंशा कुछ लोगों में होती है। उनके लिए यह खबर चेतावानी की तरह है कि फिल्म इंडस्ट्रीज के दिग्गज कलाकार राजपाल यादव को भी चेक बाउंस करने एवं समय पर बकाया न दे पाने के कारण जेल में आत्मसमर्पण करना पड़ा।
पूरी खबर है कि बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव ने दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद 5 फरवरी को तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण कर दिया। राजपाल यादव को दिल्ली हाई कोर्ट ने 4 फरवरी तक संबंधित जेल अधीक्षक के सामने आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था। हाई कोर्ट के सख्त रुख के कारण ही राजपाल यादव को जेल जाना पड़ा।
यह मामला दिल्ली की कंपनी मेसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है, जिसने राजपाल यादव की कंपनी को फिल्म निर्माण के लिए पांच करोड़ रुपए दी थी। मामला साल 2010 का है। राजपाल यादव अपने निर्देशक में अपनी पहली फिल्म ‘अता-पता लापता’ बना रहे थे। राजपाल ने मेसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से करीब 5 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था। फिल्म चल नहीं पाई और फिल्म घाटे में चली गई। इसके बाद कर्ज की रकम लौटाने में लगातार देरी होती गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि रकम चुकाने के लिए दिए गए कई चेक बाउंस हो गए।
मामले की सुनवाई के दौरान कड़कड़डूमा कोर्ट ने राजपाल यादव को कई बार नोटिस भेजे, लेकिन वे लंबे समय तक अदालत में पेश नहीं हुए, जिसके बाद साल 2013 में उन्हें 10 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। वे 3 से 6 दिसंबर 2013 तक चार दिन जेल में रहे। बाद में दिल्ली हाई कोर्ट की खंडपीठ ने उनकी अपील पर सजा निलंबित कर दी थी।
निचली अदालत ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी को छह महीने की साधारण कैद की सजा सुनाई थी, जिसे उन्होंने हाई कोर्ट में चुनौती दी। जून 2024 में दिल्ली हाई कोर्ट ने यह कहते हुए सजा पर अस्थायी रोक लगा दी कि अभिनेता कोई आदतन अपराधी नहीं हैं और उनके मामले में सुधार और समाधान की गुंजाइश है। इसी आधार पर कोर्ट ने दोनों पक्षों को आपसी समझौते की संभावनाएं तलाशने की सलाह दी और केस को मेडिएशन सेंटर भेज दिया।
मध्यस्थता के दौरान राजपाल यादव ने अदालत को भरोसा दिलाया कि वे शिकायतकर्ता कंपनी को कुल 2.5 करोड़ रुपए का भुगतान करेंगे। इसमें 40 लाख रुपए की पहली किश्त और 2.10 करोड़ रुपए की दूसरी किश्त शामिल थी। लेकिन अदालत के अनुसार, तय समयसीमा बीत जाने के बावजूद एक भी किश्त जमा नहीं की गई।
जनवरी 2026 में कोर्ट ने राजपाल यादव को अंतिम मौका दिया था, लेकिन इसके बाद भी भुगतान नहीं हुआ। इस पर सख्त रुख अपनाते हुए अब जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि चेक बाउंस मामलों में बार-बार किए गए वादों का उल्लंघन बेहद गंभीर है। कोर्ट ने कहा कि अभिनेता को कई अवसर दिए गए, लेकिन हर बार उन्होंने अदालत के भरोसे को तोड़ा है।

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