इरिडियम निवेश के नाम पर करोड़ों के रिटर्न का लालच, दो हिरासत में

नवी मुंबई : महज पांच लाख रुपये निवेश करने पर कुछ ही सप्ताह में नौ करोड़ से 28 करोड़ रुपये तक मिलने का लालच देकर कथित निवेश घोटाला चलाने के मामले में नवी मुंबई क्राइम ब्रांच ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस को संदेह है कि इस योजना के जरिए करीब 300 निवेशकों से लगभग 15 करोड़ रुपये की ठगी की गई। मामले में कम से कम 45 अन्य एजेंटों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने निवेशकों को कथित तौर पर बताया कि पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश की सीमा के पास इरिडियम के कण मिले हैं और इनकी बिक्री जर्मनी को करीब 3.34 लाख करोड़ रुपये में की गई है। इसी कथित सौदे से मिलने वाली रकम का एक हिस्सा निवेशकों में बांटने का दावा किया गया।
आरोपियों ने कथित तौर पर कहा कि पांच लाख रुपये निवेश करने वाले व्यक्ति को नवंबर 2026 के अंत तक नौ करोड़ से 28 करोड़ रुपये तक मिल सकते हैं। पुलिस को संदेह है कि इस असाधारण रिटर्न के वादे का इस्तेमाल लोगों को निवेश के लिए आकर्षित करने में किया गया। कथित सरकारी सौदे और निवेशकों को भुगतान के दावों की जांच की जा रही है।

नवी मुंबई क्राइम ब्रांच की आर्थिक खुफिया इकाई को इस कथित निवेश योजना की जानकारी मिली थी। इसके बाद पुलिस ने मामले की वास्तविकता जांचने के लिए एक अधिकारी को संभावित निवेशक बनाकर भेजा।
रिपोर्टों के अनुसार, 13 अक्टूबर को तुर्भे के एक होटल में बैठक तय हुई। वहां आरोपी ने कथित तौर पर पांच लाख रुपये के निवेश पर करोड़ों रुपये लौटाने का आश्वासन दिया। पुलिस अधिकारी ने निवेश के लिए सहमति जताते हुए एक लाख रुपये अग्रिम दिए। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

कोलकाता और कामोठे के निवासी गिरफ्तार : गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 48 वर्षीय तीर्थंकर तुषारकांति सेनगुप्ता, निवासी कोलकाता, और 58 वर्षीय जयंत अनंत ओक, निवासी कामोठे, नवी मुंबई के रूप में हुई है। पुलिस को संदेह है कि सेनगुप्ता कथित योजना का मुख्य संचालक था, जबकि ओक निवेशकों को जोड़ने के लिए एजेंट के रूप में काम करता था।
जांच एजेंसी के अनुसार, यह योजना वर्ष 2018 से संचालित होने की आशंका है। निवेशकों से तीन से पांच लाख रुपये तक लिए जाने की बात सामने आई है। पुलिस अब कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य एजेंटों की पहचान करने और निवेशकों से जुटाई गई रकम का पता लगाने में लगी है।

निवेशकों को अब तक रकम नहीं मिलने का दावा : पुलिस के अनुसार, कथित योजना से जुड़े निवेशकों को अब तक न तो वादा किया गया रिटर्न मिला है और न ही उनकी मूल निवेश राशि वापस मिलने की पुष्टि हुई है। शुरुआती अनुमान के मुताबिक, करीब 300 लोग प्रभावित हो सकते हैं और कुल रकम लगभग 15 करोड़ रुपये हो सकती है। वास्तविक पीड़ितों की संख्या और वित्तीय नुकसान की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
मामले में अनियमित जमा योजनाओं पर रोक लगाने वाले कानून और भारतीय न्याय संहिता के संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस अन्य संदिग्धों की तलाश कर रही है और पूरे नेटवर्क की जांच जारी है। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप अभी अदालत में सिद्ध नहीं हुए हैं।

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