
नेताओं की रिहाई, आंदोलन जारी रखने का ऐलान
प्रदर्शन के प्रमुख चेहरे अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पहुंचने पर पुलिस ने हिरासत में ले लिया था। रविवार को कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत के आदेश के बाद तीनों को रिहा कर दिया गया। रिपोर्टों के मुताबिक, रिहाई के साथ उन्हें एक वर्ष तक शांति और सद्व्यवहार बनाए रखने की शर्त से जोड़ा गया। रिहाई के बाद CJP नेताओं ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए स्पष्ट किया कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनावी व्यवस्था में सुधार की मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

जंतर-मंतर के आसपास कड़ी सुरक्षा, हिरासत में प्रदर्शनकारी
शनिवार की कार्रवाई के बाद रविवार को भी दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था सख्त रखी। जंतर-मंतर और मध्य दिल्ली के कई इलाकों में पुलिस बल तथा अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई। प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे लोगों को कई स्थानों पर रोके जाने और हिरासत में लिए जाने की खबरें आईं। अलग-अलग रिपोर्टों में हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या के आंकड़े अलग-अलग हैं। यातायात प्रतिबंधों और मार्ग परिवर्तन के कारण आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
मतदाता सूची और SIR पर उठाए सवाल
CJP और उसके समर्थकों का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के नाम पर बड़ी संख्या में लोगों के मतदान के अधिकार प्रभावित हुए हैं। इसी आधार पर संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और चुनावी प्रक्रिया में सुधार की मांग कर रहा है। दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग का कहना है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण मृत, स्थानांतरित, दोहरे या अपात्र मतदाताओं के नामों की जांच और सुधार के लिए किया जाता है। इस तरह मतदाता सूची को लेकर लगाए गए आरोप और आयोग का पक्ष आमने-सामने हैं।

विपक्ष का समर्थन, आंदोलन देशव्यापी बनाने की चेतावनी
पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्षी नेताओं और छात्र संगठनों ने भी सवाल उठाए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि INDIA गठबंधन के नेता इस मामले में सोमवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात के लिए पहल करेंगे। CJP नेताओं ने दिल्ली में कार्रवाई के बावजूद पीछे हटने से इनकार करते हुए अन्य शहरों में भी आंदोलन तेज करने की बात कही। मुंबई, कोलकाता, पणजी और पुणे सहित कई शहरों में विरोध की खबरें सामने आईं।
आगे भी जारी रह सकता है आंदोलन
दूसरे दिन की घटनाओं से साफ है कि यह विवाद केवल इस्तीफे की मांग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मतदाता सूची की पारदर्शिता, नागरिकों के मतदान अधिकार और शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के अधिकार पर भी बहस तेज हो गई है। फिलहाल CJP ने आंदोलन जारी रखने का रुख अपनाया है, जबकि निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है।