बांद्रा पूर्व के गरीब नगर इलाके में पश्चिम रेलवे ने हटाया 100 अतिक्रमण, हटाई जाएगी 500 झोपड़ियां

मुंबई : हाई कोर्ट के आदेश पर बांद्रा पूर्व के गरीब नगर इलाके में पश्चिम रेलवे ने 19 मई से रेलवे की जमीन पर किए गए अवैध अतिक्रमण को हटाना शुरू कर दिया है। यह अब तक का सबसे बड़ा अभियान है, जहां 500 झोपड़ियों और अन्य अवैध निर्माणों को हटाया जायेगा। आज पहले ही दिन 100 से अधिक अवैध निर्माणों (घरों) को तोड़ दिया गया। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, पांच दिन तक चलने वाले इस अभियान के तहत करीब 500 झोपड़ियां और अन्य अवैध निर्माण हटाकर 5200 वर्ग मीटर जमीन अतिक्रमण मुक्त की जाएगी, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 600 करोड़ रुपये बताई जा रही है। यह जमीन बांद्रा कुर्ला काम्प्लेक्स के नजदीक है।


अतिक्रमण हटाने के लिए 18 मई की रात से ही गरीब नगर इलाके में भारी पुलिस की बंदोबस्ती की गई थी। 19 मई की सुबह करीब 8 बजे जेसीबी और अन्य मशीनरी पहुंचते ही इलाके में तनाव का माहौल बन गया। तोड़फोड़ शुरू होते ही कुछ स्थानीय लोगों ने विरोध जताया और पुनर्वसन की मांग करते हुए प्रशासन के खिलाफ नाराजगी व्यक्त की। लेकिन, रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कार्रवाई पूरी तरह अदालत के आदेश के अनुसार की जा रही है और अभियान 23 मई तक जारी रहेगा। इस अभियान में 400 सिटी पुलिस, 400
आरपीएफ और जीआरपी, लगभग 200 पश्चिम रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग के कर्मचारी, 10 जेसीबी, 2 पोकलेन मशीन, 12 ट्रक लगाए गए थे।


रेलवे सूत्रों ने अनुसार, अतिक्रमण हटाने के बाद इस जमीन का इस्तेमाल रेलवे विस्तार परियोजनाओं, इंटीग्रेटेड रेलवे कॉम्प्लेक्स और अतिरिक्त स्टेबलिंग लाइनों के निर्माण के लिए किया जाएगा। एलिवेटेड रोड भी बनेगी। बांद्रा टर्मिनस पर नया प्लैटफॉर्म बनेगा। नई स्टेब्लिंग लाइन भी तैयार की जाएगी। इन परियोजनाओं से पश्चिम रेलवे पर 50 अतिरिक्त उपनगरीय ट्रेन सेवाएं शुरू करने की योजना को मदद मिलेगी। साथ ही दोबारा अतिक्रमण रोकने के लिए इलाके में बैरिकेडिंग भी की जाएगी।

100 पात्र निर्माण का किया जाएगा पुनर्वसन
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, इलाके में केवल 100 निर्माणों को पात्र माना गया है, जिनका पुनर्वसन किया जाएगा। बाकी करीब 500 निर्माण अवैध पाए गए हैं। इस जमीन की अनुमानित कीमत करीब 600 करोड़ रुपये है।

मामला वर्ष 2017 से अदालत में लंबित था : पश्चिम रेलवे के अनुसार, गरीब नगर अतिक्रमण का मामला वर्ष 2017 से अदालत में लंबित था। विभिन्न स्तरों पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद ही यह अभियान शुरू किया गया है।

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