मुंबई : महाराष्ट्र में जो ऑटो- टैक्सी चालक मराठी भाषा नहीं जानते हैं, उन्हें यह भाषा सीखनी चाहिए। लेकिन, भाषा को लेकर उनपर कोई जोर जबरदस्ती नहीं करनी चाहिए। यह कहना है महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का।
उन्होंने स्पष्ट कहा है कि ड्राइवरों को मराठी आनी चाहिए, लेकिन भाषा को लेकर किसी के साथ जोर-जबरदस्ती करना ठीक नहीं है। ऐसी कोशिश सरकार बर्दाश्त भी नहीं करेगी। उन्होंने आगे कहा, जिन ऑटो- टैक्सी चालकों को मराठी नहीं आती, उन्हें सिखाया जाना चाहिए।
इसके पहले परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा था कि ऑटो- टैक्सी और ऐप आधारित सेवाओं (ओला, उबर, ई बाइक टैक्सी) से जुड़े गैर-मराठी चालकों के लिए मराठी भाषा जानना अनिवार्य है। उन्होंने यह भी कहा था कि 1 मई से इनकी परीक्षा ली जाएगी और भाषा की जानकारी न रखने वालों के लाइसेंस निरस्त किए जाएंगे। उस बयान के बाद विरोधी और समर्थक अब आमने-सामने आ गए हैं।
सरकार में शामिल शिंदे सेना के नेता व पूर्व सांसद संजय निरुपम ने अपनी सरकार के परिवहन मंत्री को पत्र लिखकर नाराज़गी जताई है। इस संबंध में अगले सप्ताह परिवहन मंत्री ने बैठक बुलाई है।
निरुपम ने शुक्रवार को दहिसर के गणपत पाटील नगर में ऑटो टैक्सी चालकों से मुलाकात की थी और उनकी बात सरकार के सामने रखने का आश्वासन दिया था।
इधर, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नागपुर में पत्रकारों से कहा कि महाराष्ट्र या मुंबई में मराठी को प्राथमिकता देना गलत बात नहीं है। जिन ऑटो टैक्सी चालकों को मराठी नहीं आती, उन्हें सिखाएंगे। लेकिन मराठी के नाम पर किसी से साथ जोर-जबरदस्ती करना ठीक नहीं है। ऐसा हमारी सरकार होने भी नहीं देगी।