एजिस लॉजिस्टिक्स लिमिटेड की परियोजना पर जांच के दौरान हंगामा, पर्यावरण उल्लंघन के आरोपों की पुष्टि

मुंबई : मुंबई चेंबूर के माहुल स्थित गवान गांव परिसर में एजिस लॉजिस्टिक्स लिमिटेड द्वारा निर्माणाधीन पेट्रोलियम टर्मिनल स्टोरेज परियोजना में कथित पर्यावरणीय व अन्य नियम कानून का उल्लंघनों को लेकर 9 अक्टूबर को प्रशासन ने संयुक्त जांच की, जो भारी पुलिस सुरक्षा और एटीएस की निगरानी में तहसीलदार कुर्ला के नेतृत्व में शांतिपूर्ण किंतु नाटकीय ढंग से संपन्न हुई।

समुद्र तट से सटे बॉम्बे पोर्ट ट्रस्ट (BPT) की कब्जा वाली समुद्री किनारे की भूमि पर चल रही एजिस लॉजिस्टिक्स लिमिटेड की परियोजना के विरुद्ध स्थानीय सामाजिक संगठनों एवं पर्यावरण संरक्षण NGO समूहों द्वारा दर्ज शिकायतों के आधार पर तहसीलदार, कुर्ला के नेतृत्व में संयुक्त जांच दल गठित किया गया गया था। इस संयुक्त दल में पुलिस, एटीएस, वन विभाग, नगर भूमापान, पर्यावरण सह विभिन्न विभागों के अधिकारी और गैर-सरकारी संगठनों (NGO) के प्रतिनिधि भी सम्मिलित थे, हालांकि मुंबई महानगरपालिका के एम वार्ड के अधिकारी इस जांच से अनुपस्थित रहे जिससे शिकायकर्ता NGO समूह काफी नाराज दिखें।

परियोजना प्रबंधन ने जांच में सहयोग करने से किया इनकार
जांच के दौरान प्रशासनिक संयुक्त दल जब परियोजना स्थल पर पहुंचा, तब एजिस लॉजिस्टिक्स लिमिटेड के परियोजना प्रमुख श्री झांगड़े ने नाटकीय ढंग से गेट खोलने और प्रवेश देने से साफ इनकार कर दिया और साथ ही NGO समूह पर व्यक्तिगत आरोप लगाना भी शुरू कर दिया, जो स्पष्ट रूप से सरकारी आदेशों की अवहेलना है। पर घटनास्थल पर मौजूद मुंबई पोर्ट ट्रस्ट के एक जिम्मेदार अधिकारी ने भी एजिस लॉजिस्टिक्स लिमिटेड के परियोजना प्रमुख श्री झांगड़े को संयुक्त जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए, परंतु श्री झांगड़े अपने कड़े रुख पर अड़े रहे और “ऊपर से आदेश है” का हवाला देते हुए तहसीलदार की अध्यक्षता वाली संयुक्त जांच दल की जांच प्रक्रिया में अवरोध निर्माण कर दी।
स्थिति को बिगड़ता देख मौके पर उपस्थित RCF पुलिस थाने के जिम्मेदारी पुलिस अधिकारी ने भी परियोजना प्रमुख झांगड़े को समझाने का प्रयास किया और जांच में सहयोग के लिए अनुग्रह किए, किंतु कोई समाधान नहीं निकल सका। इस पर NGO प्रतिनिधि संदीप शुक्ला ने संयुक्त दल अध्यक्ष तहसीलदार से ऐसे अवरोध निर्माण की पंचनामा रिपोर्ट तैयार करने का अनुरोध किया।

दस्तावेज दिखाने से भी किया इनकार

तहसीलदार महोदय ने एजिस लॉजिस्टिक्स लिमिटेड के अन्य अधिकारि हेमंत कोली से परियोजना से संबंधित सभी आवश्यक अनुमति पत्र एवं दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा ताकि उचित तरीके से जांच पड़ताल की जा सके, किंतु स्थल पर उपस्थित कंपनी के संबंधित अधिकारी ने दस्तावेज दिखाने से इनकार कर दिया। इससे कंपनी की पारदर्शिता और पेट्रोलियम निर्माण कार्य से संबंधित नियमों के पालन पर गंभीर शंका और प्रश्न खड़े हो गए हैं।
घटना स्थल पर उपस्थित बॉम्बे पोर्ट ट्रस्ट के एक अधिकारी ने अपने पास उपलब्ध दस्तावेज संयुक्त जांच दल के समक्ष प्रस्तुत किए और अपना पक्ष स्पष्ट किया। इसके प्रत्युत्तर में NGO समूह प्रतिनिधियों—विशेष कर अल्बर्ट लेनार्ड, विजय चेट्टियार ने भी उनके पास उपलब्ध ठोस दस्तावेजों प्रमाणों को नियमों सह पर्यावरण और कानूनी उल्लंघनों को उजागर कर दिया और तहसीलदार महोदय से इस मामले की सुनवाई कर कठोर कार्रवाई की मांग की।

स्पष्ट हुए पर्यावरणीय विनाश के प्रमाण
NGO समूह ने यह भी साबित कर दिया कि जनवरी से मार्च 2024 और पुनः अक्टूबर से दिसंबर 2025 के बीच समुद्री तटीय भूमि पर अवैध रूप से पेड़ों की कटाई, मैंग्रोव विनाश, 2000 ट्रकों के मलबे और मिट्टी से समुद्र भराव, ड्रिलिंग एवं अन्य अनधिकृत गतिविधियाँ की गईं। यह न केवल पर्यावरणीय सह अन्य विनियमों की अवहेलना है, बल्कि बॉम्बे हाईकोर्ट के मैंग्रोव सुरक्षा के आदेशों की भी सीधी अवज्ञा है।
इस प्रकरण में एजिस लॉजिस्टिक्स लिमिटेड, बॉम्बे पोर्ट ट्रस्ट और मैंग्रोव वन विभाग के पथभ्रष्ट अधिकारी कठघरे में है। जांच स्थल पर एजिस लॉजिस्टिक्स लिमिटेड और बॉम्बे पोर्ट ट्रस्ट अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी थोपते नज़र आए, जबकि मैंग्रोव व वन विभाग के अधिकारी मौन साधे रहे, जिससे उनकी भूमिका पर भी सवाल उठते हैं।

अब उठते हैं कई गंभीर प्रश्न
क्या समुद्री भूमि से उतनी ही मात्रा में मिट्टी हटाकर उसे पूर्व स्थिति में बहाल किया जाएगा….?

क्या RCF पुलिस थाने में FIR दर्ज कर कंपनी जिम्मेदार अधिकारी,ठेकेदार एवं मिट्टी माफिया के विरुद्ध F.I.R.फौजदारी कार्रवाई की जाएगी…?

क्या नियमों की अनदेखी करने वाले पथभ्रष्ट अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी….?
क्या पर्यावरणीय अपराधों और नियमों का उल्लंघन के लिए एजिस लॉजिस्टिक्स लिमिटेड को काली सूची (Blacklist) में डाला जाएगा….?

क्या पर्यावरण क्षति के लिए दंडात्मक राशि वसूल कर पर्यावरण व वन की बहाली कार्य किया जाएगा….?

और सबसे महत्वपूर्ण, क्या यह संदेश जनता को दिया जाएगा कि नियम और कानून सर्वपारिय है और सभी पर समान रूप से लागू होते हैं….?

जनता को है प्रशासनिक और न्यायिक कार्रवाई का इंतज़ार

चेंबूर एवं मुंबई की जागरूक जनता सह राजनीतिक गलियारों अब इस मामले पर प्रशासनिक व न्यायिक कार्रवाई की प्रतीक्षा कर रही है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि तहसीलदार एवं संबंधित प्रशासनिक विभाग इस प्रकरण में क्या कदम उठाते हैं – क्या दोषियों को सज़ा मिलेगी या यह मामला भी अन्य फाइलों की तरह दबा दिया जाएगा…?

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