मुंबई : 3 साल की सजा और 3 करोड़ के जुर्माने के बावजूद नवी मुंबई पुलिस आयुक्तालय के अंतर्गत आने वाले कई पुलिस थानों की सीमा में इन दिनों “बिंगो” नामक ऑनलाइन जुए का जाल तेजी से फैलता जा रहा है। केंद्र सरकार ने ऑनलाइन जुआ संचालन व उसमें भाग लेने वालों पर तीन वर्ष की सजा व तीन करोड़ रुपये जुर्माना निर्धारित किया है। फिर भी यह जुआ नवी मुंबई क्षेत्र में खुलेआम चल रहा है। इसी तरह रायगढ़ जिला, ठाणे, कल्याण, भिवंडी और मुंब्रा में भी ऑनलाइन जुआ का खेल धडल्ले से चल रहा है। हाल ही में रायगढ़ पुलिस ने करीब 3 हजार करोड़ की जालसाजी का पर्दाफाश किया था। कथित तौर पर इन मामलों में अब तक सैकड़ों लोगों ने अपनी जान गंवाई है। बावजूद इसके ऑनलाइन जुआ माफियाओं का नेटवर्क फिर से तेजी फैलता जा रहा है।

गौरतलब है कि अवैध रूप से चल रहे ऑनलाइन जुए का शिकार अब आम नागरिकों के साथ-साथ किसान और युवा वर्ग भी हो रहा है। हाल ही में खांदा कॉलोनी पुलिस स्टेशन क्षेत्र में घटित एक मामले में मलकरी कांबले नामक किसान ने अपनी खेती बेचकर और बैंक से धनराशि निकालकर कुल 40 लाख रुपये ऑनलाइन “बिंगो” जुए में हर गया। इस मामले में मुख्यमंत्री समेत पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को लिखे गए पत्र और मेल से दी गई शिकायत के अनुसार, कांबले ने 20 लाख रुपये नकद और 20 लाख रुपये बैंक ऑफ इंडिया से चेक व फोनपे के माध्यम से जमा किए थे। एक ही दिन में भारी नुकसान होने से व्यथित होकर उन्होंने उसी रात वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक (खांदा कॉलोनी) को लिखित आवेदन देकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी।

हालांकि घटना दर्ज होने के बावजूद अब तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई, जिससे नाराज होकर किसान ने 2 अक्टूबर 2025 को मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, महाराष्ट्र पुलिस महानिदेशक और नवी मुंबई पुलिस आयुक्त को ईमेल के माध्यम से शिकायत भेजी है। कांबले का आरोप है कि नवी मुंबई के कई क्षेत्रों में “बिंगो” नाम से यह ऑनलाइन जुआ का खेल धडल्ले से चल रहा हैं, जिसे खलीलउल्ला खान, संतोष समाधान गाडगे, चांद, और राजेश शेट्टी जैसे संचालक मोबाइल ऐप के माध्यम से चला रहे हैं। यह गिरोह लोगों को पैसे दोगुने करने का लालच देकर खेल में फँसाता है और बाद में उनकी जमा पूंजी हड़प लेता है।
किसान ने आरोप लगाया कि प्रशासन व पुलिस की शिथिलता के चलते ये जुआ माफिया कानून की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर ऑनलाइन गेमिंग प्रतिबंध अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो वे न्याय न मिलने की निराशा में आत्मदहन करने को विवश होंगे। इस घटना ने एक बार फिर पुलिस के कार्यों पर सवाल खड़ा किया है कि जब केंद्र सरकार ने ऑनलाइन जुए पर प्रतिबंध लगाते हुए सख्त सजा का प्रावधान किया है, तब भी ऐसे गिरोह किसके संरक्षण में बेखौफ सक्रिय हैं?