CBI की विशेष अदालत ने साक्ष्यों को अपर्याप्त माना, सात अन्य आरोपी भी दोषमुक्त
मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति से जुड़े बहुचर्चित और संवेदनशील पवनराजे निंबालकर दोहरे हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाते हुए मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत ने शनिवार को पूर्व गृह मंत्री पद्मसिंह पाटिल समेत सभी आठ आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ साजिश की कड़ी को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।
विशेष सीबीआई अदालत के न्यायाधीश सत्यनारायण नवलंदर ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष मुख्य रूप से सरकारी गवाह बने पारसमल जैन की गवाही पर निर्भर था, लेकिन उनकी गवाही विश्वसनीय और पर्याप्त नहीं पाई गई। अदालत ने इसे संदिग्ध मानते हुए स्वीकार नहीं किया।
ओमराजे निंबालकर के लिए बड़ा झटका
यह फैसला धाराशिव से सांसद Omraje Nimbalkar और निंबालकर परिवार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। ओमराजे निंबालकर पिछले दो दशकों से अपने पिता पवनराजे निंबालकर और उनके ड्राइवर समद काजी की हत्या के मामले में न्याय की उम्मीद लगाए हुए थे।
राजनीतिक गलियारों में इस मामले के फैसले को ओमराजे निंबालकर के हालिया राजनीतिक रुख और सत्ता पक्ष के समीकरणों से भी जोड़कर देखा जा रहा था।
क्या था पूरा मामला?
3 जून 2006 को नवी मुंबई के कलंबोली इलाके में पवनराजे निंबालकर और उनके ड्राइवर समद काजी की कार पर अज्ञात हमलावरों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई थी।
शुरुआत में मामले की जांच नवी मुंबई पुलिस और राज्य सीआईडी ने की, लेकिन जांच से असंतुष्ट निंबालकर परिवार की मांग पर बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट ने मामला सीबीआई को सौंप दिया।
सीबीआई ने जांच के दौरान तत्कालीन एनसीपी सांसद पद्मसिंह पाटिल पर हत्या की साजिश रचने और उसके लिए वित्तीय मदद उपलब्ध कराने का आरोप लगाया था।
पद्मसिंह पाटिल की गिरफ्तारी और मुकदमा
जांच अपने हाथ में लेने के बाद सीबीआई ने 7 जून 2009 को पद्मसिंह पाटिल को गिरफ्तार किया था। उसी वर्ष सितंबर में अलीबाग सत्र न्यायालय ने उन्हें जमानत दे दी।
इस मामले में पद्मसिंह पाटिल के अलावा लातूर के व्यवसायी सतीश मंडाडे, सेवानिवृत्त आबकारी निरीक्षक मोहन शुक्ला तथा कथित शूटरों सहित कुल नौ लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया था। बाद में पारसमल जैन सरकारी गवाह बन गए।
20 साल की कानूनी लड़ाई: घटनाक्रम
मुख्य घटनाएं
- 3 जून 2006: कलंबोली में पवनराजे निंबालकर और ड्राइवर समद काजी की गोली मारकर हत्या।
- 23 अक्टूबर 2008: बॉम्बे हाईकोर्ट ने जांच सीबीआई को सौंपी।
- 7 जून 2009: पद्मसिंह पाटिल गिरफ्तार।
- अगस्त 2009: सीबीआई ने 5,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की।
- सितंबर 2009: अलीबाग अदालत से जमानत मिली।
- जुलाई 2011: आरोप तय होने के बाद ट्रायल शुरू।
- नवंबर 2012: सुप्रीम कोर्ट ने केस मुंबई ट्रांसफर किया।
- जुलाई 2019: समाजसेवी Anna Hazare ने गवाह के रूप में बयान दर्ज कराया।
- जुलाई 2025: अभियोजन पक्ष के गवाहों की जिरह पूरी।
- 14 मई 2026: मामला फैसले के लिए सूचीबद्ध।
- 16 जून 2026: फैसला सुरक्षित रखा गया।
- 20 जून 2026: सभी आठ आरोपी बरी।
अदालत ने क्या कहा?
अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष हत्या की साजिश और आरोपियों की भूमिका को साबित करने के लिए ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य पेश नहीं कर सका। विशेष रूप से सरकारी गवाह पारसमल जैन की गवाही में कई विसंगतियां पाई गईं, जिसके कारण आरोपियों के खिलाफ आरोप संदेह से परे सिद्ध नहीं हो सके।
करीब दो दशक तक चले इस चर्चित मुकदमे का अंत सभी आरोपियों की रिहाई के साथ हुआ। हालांकि अदालत का फैसला कानूनी रूप से अंतिम माना जाएगा, लेकिन निंबालकर परिवार के लिए यह मामला न्याय की अधूरी तलाश के रूप में लंबे समय तक चर्चा में बना रह सकता है।