नहीं मानी शर्तें तो रुक सकती है गैस बुकिंग
मुंबई : घरेलू गैस वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और फर्जीवाड़ा मुक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार और तेल विपणन कंपनियों ने कई नए नियम लागू किए हैं। इन नियमों का उद्देश्य फर्जी कनेक्शन, कालाबाजारी और डुप्लीकेट उपभोक्ताओं पर रोक लगाना है।
तेल कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि नियमों का पालन नहीं करने वाले उपभोक्ताओं की गैस बुकिंग और डिलीवरी प्रभावित हो सकती है।
LPG उपभोक्ताओं के लिए लागू किए गए 7 अहम नियम।
1. मोबाइल नंबर अपडेट कराना जरूरी गैस बुकिंग, डिलीवरी और ओटीपी संबंधी सभी सूचनाएं पंजीकृत मोबाइल नंबर पर भेजी जाती हैं। यदि आपने अपना मोबाइल नंबर बदल लिया है तो उसे जल्द से जल्द गैस एजेंसी में अपडेट कराना आवश्यक है।
2. शहरों में दूसरी बुकिंग के लिए 25 दिन का इंतजार नए नियमों के अनुसार शहरी क्षेत्रों में एक सिलेंडर की डिलीवरी के बाद 25 दिन पूरे होने से पहले दूसरा सिलेंडर बुक नहीं किया जा सकेगा। इसका उद्देश्य जमाखोरी और अनावश्यक खपत पर रोक लगाना है।
3. ई-केवाईसी और बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य सभी उपभोक्ताओं के लिए ई-केवाईसी (e-KYC) जरूरी कर दी गई है। कई क्षेत्रों में बायोमेट्रिक सत्यापन भी किया जा रहा है। केवाईसी पूरा नहीं होने पर गैस सेवा प्रभावित हो सकती है।
4. ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन का अंतर गांवों में गैस वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए दो सिलेंडर बुकिंग के बीच कम से कम 45 दिन का अंतर निर्धारित किया गया है। इससे फर्जी बुकिंग और कालाबाजारी पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
5. एक पते पर कई कनेक्शनों की जांच तेल कंपनियां अब ऐसे पतों की जांच कर रही हैं जहां एक से अधिक एलपीजी कनेक्शन सक्रिय हैं। जांच में फर्जी या नियमों के विरुद्ध पाए गए कनेक्शनों को ब्लॉक किया जा सकता है।
6. सिलेंडर डिलीवरी के लिए OTP अनिवार्य अब गैस सिलेंडर की डिलीवरी के समय ओटीपी सत्यापन जरूरी होगा। उपभोक्ता के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर भेजे गए ओटीपी को डिलीवरी कर्मी को बताने के बाद ही सिलेंडर सौंपा जाएगा।
7. PNG क्षेत्रों में सब्सिडी पर विशेष निगरानी जिन क्षेत्रों में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की सुविधा उपलब्ध है, वहां एलपीजी कनेक्शन और सब्सिडी पर विशेष निगरानी रखी जा रही है ताकि कोई उपभोक्ता दोनों सुविधाओं का अनुचित लाभ न उठा सके।
उपभोक्ताओं को क्या होगा फायदा?
इन नए नियमों से वास्तविक और जरूरतमंद उपभोक्ताओं को समय पर गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। साथ ही घरेलू गैस के व्यावसायिक उपयोग, फर्जी कनेक्शन और कालाबाजारी जैसी समस्याओं पर रोक लगेगी। इससे गैस वितरण व्यवस्था अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और प्रभावी बनेगी।