फिल्मी कहानी की तरह 29 साल बाद हत्या कर लिया हत्या का बदला

मुंबई : फिल्मों में जैसे हत्या का बदला हत्या से लिया जाता दिखाया जाता है, ठीक उसी तरह मुंबई में एक मामला सामने आया है। हत्या के 29 साल बाद मरने वाले के भतीजे ने मुखबिरी करने वाले की हत्या कर दी। मामला 1997 का है।
मुख्य आरोपी सादिक जवार, पूर्व गैंगस्टर सादिक कालिया का भतीजा है। सादिक कालिया 1999 में एक पुलिस एनकाउंटर में मारा गया था।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, दादर में दयानायक पुलिस की टीम ने एक एनकाउंटर किया था, जिसमें सादिक कालिया की मौत हुई थी। कुछ वक्त बाद सादिक के छोटे भाई के घर लड़का पैदा हुआ। पिता ने कहा, यह लड़का बड़ा होकर अपने ताऊ की मौत का बदला लेगा। उसका नाम भी ताऊ के नाम पर सादिक रखा गया। इसी सादिक ने ने 20 अप्रैल को नागपाड़ा इलाके में एक 78 वर्षीय बुजुर्ग की धारदार हथियार से हत्या कर दी। बुजुर्ग के बारे में कहा जाता था कि उसी ने 29 साल पहले सादिक एनकाउंटर के लिए मुखबिरी की थी।
घटना में शामिल लोगों में से 29 साल के सादिक और उसके साथी को मुंबई क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस का आरोप है कि सादिक जवार ने इक़बाल इब्राहिम सेलिया की हत्या की साज़िश रची। उसे शक था कि सेलिया ने ही उस समय उसके चाचा के ठिकाने के बारे में पुलिस को जानकारी दी थी। जांचकर्ताओं का दावा है कि सेलिया ने कथित तौर पर एनकाउंटर स्पेशलिस्ट दया नायक को टिप दी थी, जिसके कारण कालिया की मौत हुई थी। इसी सोच से प्रेरित होकर, जवार ने कथित तौर पर बदले की भावना से इस हत्या की योजना बनाई और घर में घुसकर सेलिया की हत्या कर दी। घटना 20 अप्रैल की शाम मुंबई के नागपाड़ा स्थित सेलिया के घर पर हुई।
मुंबई क्राइम ब्रांच ने बताया कि घटना के बाद दोनों आरोपी एंटॉप हिल और विद्याविहार होते हुए कल्याण पहुंचे, और फिर वहां से नागपुर भाग गए। तकनीकी निगरानी और सबूतों के आधार पर, पुलिस की टीमों ने नागपुर से सादिक जवार और उसके 22 साल के साथी, नौशाद मितानी को ढूंढ निकाला और गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस की पूछताछ के दौरान, दोनों आरोपियों सादिक जवार और नौशाद मितानी ने इस अपराध में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली।

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