– एजेंसी तो लापरवाह है ही, अधिकारी भी साधे रहते हैं चुप्पी
मुंबई : मुंबई मालाड (पश्चिम) के मालवनी में 27 जनवरी की सुबह एक चोल में रसोई गैस सिलेंडर के ब्लास्ट कर जाने से सात लोग घायल हो गए। घायलों को अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। गैस सिलेंडर भारत गैस (बीपीसीएल) की थी। गैस सिलेंडर ब्लास्ट होने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया।
सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम पहुंची और आग पर काबू पाया। मामले की पुष्टि पत्रकारों को वरिष्ट पुलिस निरीक्षक शैलेंद्र नागरकर और पुलिस उपनिरीक्षक प्रवीण काम्बले ने की है।
घटना के बारे में बताया जा रहा है कि चोल के दो मंजिला झोपड़े की पहली मंजिल पर एक कमरे में गैस लीकेज हुआ और देखते ही देखते ब्लास्ट कर गया। सिलेंडर ब्लास्ट होते ही कमरे में आग फैल गई। सूचना पर दमकल कर्मी पहुंचे और तत्परता से आग पर काबू पाया।
हादसे के बाद सवाल उठ रहा है कि आखिर हादसा हुआ कैसे। जानकार बताते हैं कि बीपीसीएल गैस कंपनी से सिलेंडर को पहले स्थाई गोदाम में पहुंचाना चाहिए और वहां गैस लीक तो नहीं कर रहा, उसकी चेकिंग करनी चाहिए। लेकिन एजेंसी वाले गोदाम में न ले जाकर बिना जांच किए सीधे कस्टमर को सप्लाई कर देते हैं। सिलेंडर की गड़बड़ियां पता नहीं चलता और घटना हो जाती है। दूसरी ओर गोदाम में सिलेंडर ले जाया जाता है कि नहीं इसे देखने और इसकी जांच करने के लिए कंपनी के अधिकारी हैं, लेकिन न तो जांच करते हैं और न ही गोदाम का निरीक्षण करते हैं। अधिकारी की लापरवाही से ऐसे हादसे होते हैं।
आज की घटना की जांच चल रही है, लेकिन सतर्कता नहीं बढाई गई तो इस तरह की घटना बड़ी हो सकती है और जान मॉल की क्षति हो सकती है।