पत्नी विवाद के मामले में एनसीपी नेता और पूर्व मंत्री धनंजय मुंडे को कोर्ट से मिली राहत

पुणे/महाराष्ट्र : महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेता और पूर्व मंत्री धनंजय मुंडे को बीड कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। धनंजय की पत्नी होने का दावा करने वाली करुणा शर्मा मुंडे ने कोर्ट में एक आपराधिक याचिका दाखिल की थी। इसमें उन्होंने दावा किया था कि धनंजय मुंडे ने 2024 के विधानसभा चुनावों के नामांकन पत्र में अहम जानकारियां छिपाई हैं। बीड के परली वैजनाथ की अदालत ने माना कि धनंजय ने चुनाव जीतने के इरादे से तथ्य नहीं छिपाए थे। न्यायिक मजिस्ट्रेट दीपक बोर्डे ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता, करुणा मुंडे आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला स्थापित करने में विफल रही हैं। अदालत ने कहा कि जिन तथ्यों को कथित तौर पर छिपाया गया। उनका उद्देश्य चुनाव जीतना नहीं था। न ही इससे चुनावी नतीजों पर कोई प्रभाव पड़ा। कोर्ट ने इसके बाद करुणा मुंडे की क्रिमिनल कंप्लेंट को खारिज कर दिया। धनंजय मुंडे को यह बड़ी राहत ऐसे वक्त पर मिली है, जब वह फिर से फडणवीस सरकार में वापसी के लिए पूरा जोर लगा रह है। फडणवीस सरकार में अजित पवार की एनसीपी के कोटे से एक मंत्री पद खाली है। यह पद कृषि मंत्री माणिकराव कोकाटे के इस्तीफे के बाद खाली हुआ है।

करुणा मुंडे ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 125(A) और 33(A)(1) के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू की थी। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने 1996 में धनंजय मुंडे से शादी की थी और आरोप लगाया कि उन्होंने 2024 के राज्य विधानसभा चुनावों के लिए भरे गए फॉर्म नंबर 26 में अपना नाम और अपनी संपत्ति का खुलासा नहीं किया।

क्या है विवाद
धनंजय मुंडे की तरफ से कोर्ट में कहा गया कि कानूनी रूप से शादी 2001 से राजश्री मुंडे से हुई है। उन्होंने कहा कि वह 2013 से सभी चुनावी हलफनामों में लगातार घोषित करते रहे हैं। मुंडे शिकायतकर्ता के साथ एक सहमति वाले रिश्ते को स्वीकार किया। जिससे दो बच्चे हुए उन्होंने कहा कि करुणा मुंडे को उनकी शादी के बारे में पता था और कहा कि 2020 में उनके रिश्ते खराब हो गए।मजिस्ट्रेट ने शुरुआती तौर पर यह माना कि आरोपी ने चुनाव में चुने जाने के इरादे से जानकारी नहीं छिपाई थी। उन्होंने कहा कि कार्यवाही जारी रखने का कोई फायदा नहीं होगा। इसके बाद कोर्ट ने शिकायत खारिज कर दी।

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