महाराष्ट्र लातूर के रहने वाले थे पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल

91 साल की उम्र में हुआ निधन, कई बीमारियों का चल रहा था इलाज

मुंबई : महाराष्ट्र के लातूर के रहनेवाले पूर्व गृह मंत्री शिवराज पाटिल का उनके आवास देवघर में आज निधन हो गया। वह 91 साल के थे। वह उम्र संबंधी बीमारियों से ग्रस्त थे। उनके परिवार में उनके बेटे शैलेश पाटिल, भाजपा नेता बहू अर्चना और दो पोतियां हैं। उनकी एक बेटी है, जो शादीशुदा है। शिवराज पाटिल कांग्रेस के कद्दावर नेताओं में से एक थे। वह 2004 से 2008 तक केंद्रीय गृह मंत्री और 1991 से 1996 तक लोकसभा के 10वें अध्यक्ष रहे।

शिवराज पाटिल का जन्म 12 अक्टूबर 1935 को तत्कालीन हैदराबाद रियासत (वर्तमान महाराष्ट्र, भारत) के लातूर जिले (मराठवाड़ा क्षेत्र) के चकुर गांव में हुआ था। उन्होंने हैदराबाद के उस्मानिया यूनिवर्सिटी से साइंस में ग्रैजुएशन किया। उसके बाद एलएलबी करने के लिए वह बॉम्बे गए और यहीं बॉम्बे यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की।
शिवराज पाटिल ने राजनीति में एंट्री 1967 में की। वह 1969 तक लातूर नगर पालिका में शामिल रहे। केशवराव सोनावाने और माणिकराव सोनावाने ने शिवराज पाटिल को आगे बढ़ाया औक लातूर निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने का पहला मौका दिलवाया।
शिवराज पाटिल पंचमसाली लिंगायत समुदाय से थे। उनकी शादी विजय पाटिल से 1963 में हुई थी। वह सत्य साई बाबा के कट्टर अनुयायी भी थे। 1972 से 1980 तक वह महाराष्ट्र विधानसभा में लातूर नगर के विधायक रहे। उन्होंने दो कार्यकाल पूरे किए। पहली बार वह 1972 से 1978 तक विधायक रहे। वहीं दूसरी बार 1978 से 1980 तक विधायक रहे। वह लोक उपक्रम समिति के अध्यक्ष, उप मंत्री (कानून एवं न्यायपालिका, सिंचाई, प्रोटोकॉल), विधानसभा के उपाध्यक्ष और अध्यक्ष जैसे विभिन्न पदों पर भी रहे।
1980 में शिवराज पाटिल लातूर निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा सासंद चुने गए। 1999 तक वह लगातार सांसद रहे। उन्होंने 1980, 1984, 1989, 1991, 1996, 1998 और 1999 में लगातार सात लोकसभा चुनाव जीते। 2004 के लोकसभा चुनाव में वह भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार रूपताई पाटिल निलंगेकर से चुनाव हार गए थे।
शिवराज पाटिल इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार में रक्षा राज्य मंत्री थे। उन्हें वाणिज्य मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार भी दिया गया था। यहां से उन्हें विज्ञान और प्रौद्योगिकी, परमाणु ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, अंतरिक्ष और महासागर विकास (1983-84) में स्थानांतरित कर दिया गया। 1983-86 के दौरान, वे CSIR इंडिया के उपाध्यक्ष थे। उन्होंने रक्षा, विदेश मामलों, वित्त, संसद सदस्यों के वेतन और भत्तों से संबंधित समितियों सहित विभिन्न समितियों में भी अपनी सेवाएं दीं।

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