मुंबई की मीठी नदी की सफाई में 65 करोड़ का भ्रष्टाचार, दो गिरफ्तार

मुंबई : मुंबई की मीठी नदी की सफाई में भ्रष्टाचार हुआ है। गाद निकालने में 65 करोड़ रुपए की हेराफेरी हुई है। इस मामले में मुंबई पुलिस ने दो और लोगों को गिरफ्तार किया है।
मुंबई पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार दो लोग ठेकेदार हैं और इनकी पहचान सुनील उपाध्याय (54) और महेश पुरोहित (48) के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, दोनों ठेकेदारों ने फर्जी समझौता ज्ञापनों (एमओयू) के जरिए काम के ठेके हासिल किए थे। दोनों को एस्प्लेनेड कोर्ट में पेश किया गया, जिसने उन्हें 16 दिसंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया। इस मामले में अब तक कुल 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
आरोप है कि ठेकेदारों ने मीठी नदी से निकली गाद को मुंबई से बाहर ले जाने के लिए भी फर्जी बिल बनाए और नगर निगम के अधिकारियों ने उन्हें मंजूरी दे दी।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार दोनों ठेकेदारों पर बीएमसी अधिकारियों, बिचौलियों और अन्य के साथ मिलकर 2013 से 2023 के बीच डंपिंग ग्राउंड के फर्जी समझौता ज्ञापन तैयार करने का आरोप है। गिरफ्तार सुनील उपाध्याय एसएनबी इंफ्रास्ट्रक्चर में निदेशक है और महेश पुरोहित एमबी ब्रदर्स की फर्म में पार्टनर है।
मुंबई में मीठी नदी की सफाई हर साल मानसून सीजन से पहले कराई जाती है। यह एक महत्वपूर्ण नदी है। बारिश के मौसम में इस नदी का भयावह रूप सामने आता है। दरअसल, यह नदी शहर के बीच से होकर बहती है और कचरे से पटी रहती है। ऐसे में इसकी सफाई को लेकर समझौते किए जाते हैं।
इसी साल अगस्त महीने में प्रवर्तन निदेशालय ने मीठी नदी डीसिल्टिंग घोटाले के सिलसिले में मुंबई में की गई छापेमारी के बाद 47 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति फ्रीज की थी। तब ईडी के मुंबई जोनल ऑफिस द्वारा 31 जुलाई को सर्च ऑपरेशन किया गया था और बीएमसी के ठेकेदारों और एक सिविक इंजीनियर से जुड़े आठ ठिकानों पर छापेमारी की गई थी।
इस ऑपरेशन के तहत विभिन्न बैंक खातों, फिक्स्ड डिपॉजिट और डीमैट खातों में रखी 47 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम फ्रीज कर दी गई थी।–आईएएनएस

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