बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा, डांस बार में डांसर का डांस देख रहा व्यक्ति अपराधी नहीं बन जाता

चेंबूर के एक व्यक्ति के खिलाफ दायर आरोपपत्र को किया खारिज

मुंबई : बॉम्बे हाई कोर्ट ने आपराधिक दायित्व की सीमाओं को स्पष्ट करते हुए कहा है कि अगर किसी बार में डांसर डांस कर रही हैं, और वहां कोई मौजूद है तो वह अपराधी नहीं बन जाता। बॉम्बे हाई कोर्ट ने यह वक्तव्य चेंबूर निवासी एक व्यक्ति के खिलाफ दायर आरोपपत्र को खारिज करते वक्त दिया। इस व्यक्ति को 4-5 मई, 2024 की रात सुरभि पैलेस बार और रेस्टोरेंट में पुलिस की छापेमारी के दौरान गिरफ्तार किया गया था।
पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर रेस्टोरेंट मैनेजर, ऑर्केस्ट्रा कलाकारों और कई ग्राहकों सहित 11 लोगों को हिरासत में लिया गया था। पुलिस ने आरोप लगाया कि वहां मौजूद महिलाएं अश्लील नृत्य कर रही थीं।
आरोपी के वकील का पक्ष
आरोपों को चुनौती देते हुए, ग्राहक ने बॉम्बे हाई कोर्ट में तर्क दिया कि उसके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं। उसने कहा कि पुलिस रिपोर्ट को सच मान लेने पर भी, ऐसा कुछ नहीं है जिससे पता चले कि उसने किसी आदेश की अवहेलना की हो या किसी अवैध गतिविधि को बढ़ावा दिया हो। उसके वकील, सनी ए वास्कर ने ज़ोर देकर कहा कि सिर्फ़ उस बार के अंदर बैठना जहां डांस हो रहा हो, कानून के तहत अपराध नहीं माना जा सकता।
अभियोजन पक्ष इससे असहमत था। अतिरिक्त लोक अभियोजक पीपी मालशे ने अदालत को बताया कि प्राथमिकी से पता चलता है कि आवेदक नर्तकियों को प्रोत्साहित कर रहा था और इसलिए उसे इस स्तर पर दोषमुक्त नहीं किया जा सकता। हालांकि, न्यायमूर्ति एनजे जमादार ने सबूतों को अपर्याप्त पाया। अदालत ने कहा कि आवेदक द्वारा कलाकारों को प्रोत्साहित करने के अस्पष्ट दावे के अलावा, पुलिस ने कोई प्रत्यक्ष कार्रवाई, कोई उकसावे, और कोई भी ऐसी सामग्री नहीं दिखाई जो साजिश या जानबूझकर मदद का संकेत देती हो। न्यायाधीश ने कहा कि पंचनामा में केवल बार में उसकी उपस्थिति दर्ज की गई थी।

अदालत ने कहा कि किसी ऐसे प्रतिष्ठान में मात्र उपस्थिति जहां डांस हो रहा हो, वैध आदेशों की अवहेलना या उकसावे की श्रेणी में नहीं आती। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया आईपीसी या राज्य के अश्लील नृत्य अधिनियम के तहत कोई मामला नहीं बनने पर, अभियोजन जारी रखना प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। इसके साथ ही, हाई कोर्ट ने ग्राहक के खिलाफ आरोप पत्र को रद्द कर दिया, जिससे अपराध में वास्तविक भागीदारी और घटनास्थल पर केवल उपस्थिति के बीच एक स्पष्ट रेखा खींच दी गई।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *