नई दिल्ली : राजधानी दिल्ली में लाल किले के पास हुए बम ब्लास्ट की जांच अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंप दी गई है। इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई थी, जिसमें कई अधिकारी शामिल हुए थे। इस बैठक में ही फैसला किया गया कि दिल्ली के लाल किले के पास हुए ब्लास्ट की जिम्मेदारी अब एनआईए को सौंपी जाएगी, ताकि ब्लास्ट का वास्तविक कारण सामने आ सके।
दूसरी ओर सूत्रों के अनुसार कार का मालिकाना हक कई बार बदला जा चुका है। पहले नदीम को बेचा गया, फिर फरीदाबाद के सेकेंड हैंड डीलर को। इसके बाद यह गाड़ी आमिर ने खरीदी, फिर तारीक ने, जिस पर फरीदाबाद के आतंकी मॉड्यूल से जुड़े होने का संदेह है। इसके बाद मोहम्मद उमर ने इसे खरीद लिया था।
दूसरी ओर, समाचार एजेंसी ANI को सूत्रों ने बताया कि यह आत्मघाती हमला नहीं था। संदिग्ध ने घबराहट में विस्फोट किया। बम पूरी तरह से विकसित नहीं हुआ था, इसलिए इसका प्रभाव सीमित रहा। विस्फोट से कोई गड्ढा नहीं बना और न ही कोई छर्रे या प्रक्षेपास्त्र मिले। विस्फोट के समय वाहन गतिमान था और आईईडी भारी जनहानि करने के लिए सुसज्जित नहीं था। माना जा रहा है कि दिल्ली-NCR और पुलवामा में कई स्थानों पर सुरक्षा एजेंसियों द्वारा की गई छापेमारी में भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद होने के कारण संदिग्ध ने बढ़ते दबाव के चलते जल्दबाजी में कदम उठाया।