
प्रदर्शन की सबसे बड़ी राजनीतिक विशेषता यह रही कि लंबे समय बाद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे एक मंच पर दिखाई दिए। दोनों नेताओं ने छात्रों के आंदोलन को समर्थन देते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकार बताया और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने की अपील की।
इस दौरान उद्धव ठाकरे ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को छात्रों की एक बड़ी जीत बताया। उन्होंने कहा कि यह छात्रों के संघर्ष और जनदबाव का परिणाम है। वहीं राज ठाकरे ने प्रदर्शन में शामिल लोगों से अनुशासन बनाए रखने की अपील करते हुए चेतावनी दी कि यदि कोई असामाजिक तत्व मार्च में बाधा डालने की कोशिश करेगा तो उसे बख्शा नहीं जाएगा।

प्रदर्शन को देखते हुए मुंबई पुलिस ने पूरे शहर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। कई संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया और यातायात व्यवस्था में भी बदलाव किए गए। प्रशासन ने लोगों से वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की अपील की।
यह प्रदर्शन हाल के वर्षों में मुंबई में छात्रों के समर्थन में आयोजित सबसे बड़े आंदोलनों में से एक माना जा रहा है, जिसने राज्य और राष्ट्रीय राजनीति दोनों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।