मुंबई : मुंबई के चेंबूर में 30 जून को स्कूल बस पर पीपल का विशाल पेड़ गिरने से 11 वर्षीय छात्र विहान श्रीवास्तव की मौत और कई अन्य बच्चों के घायल होने की घटना की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सामने आ गई है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि हादसा केवल तेज बारिश की वजह से नहीं हुआ, बल्कि पेड़ के अंदरूनी हिस्से के सड़ जाने (Internal Decay) और जड़ों के गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त होने के कारण उसकी मजबूती खत्म हो गई थी।
रिपोर्ट में क्या-क्या सामने आया?
जांच समिति के अनुसार, दुर्घटनाग्रस्त पीपल का पेड़ बाहर से सामान्य दिखाई दे रहा था, लेकिन उसके तने के अंदर व्यापक सड़न थी। इसके अलावा सड़क किनारे हुए निर्माण और अन्य गतिविधियों के कारण उसकी जड़ों को भी नुकसान पहुंचा था। यही कारण रहा कि लगातार बारिश और तेज हवा का दबाव पड़ते ही पेड़ अचानक उखड़कर स्कूल बस पर गिर पड़ा।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि हादसे से कई महीने पहले संबंधित विभागों के बीच पत्राचार में इस सड़क पर पेड़ों की जड़ों को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई थी। सड़क निर्माण कार्य के दौरान जड़ों के प्रभावित होने की बात अधिकारियों के संज्ञान में थी, लेकिन समय रहते आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई। इस लापरवाही ने हादसे को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हादसे में क्या हुआ था?
30 जून की दोपहर चेंबूर के रोड नंबर-11 पर स्कूल की छुट्टी के बाद बच्चों को लेकर जा रही बस पर करीब 70 वर्ष पुराना विशाल पीपल का पेड़ अचानक गिर पड़ा। हादसे में 11 वर्षीय छात्र विहान श्रीवास्तव की मौत हो गई, जबकि चार अन्य बच्चे घायल हुए थे। स्थानीय लोगों, दमकल कर्मियों और पुलिस ने शीघ्र राहत एवं बचाव कार्य चलाकर बच्चों को बस से बाहर निकाला।
BMC ने शुरू की कार्रवाई
प्रारंभिक जांच रिपोर्ट आने के बाद BMC ने उद्यान विभाग (Garden Department) के एक अधिकारी को निलंबित कर दिया है। साथ ही शहर के पुराने और जोखिम वाले पेड़ों की विशेष जांच कराने तथा उनकी नियमित स्वास्थ्य जांच (Tree Health Audit) का निर्देश दिया गया है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
इस हादसे ने मुंबई में मानसून के दौरान पेड़ों के रखरखाव और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल पेड़ों की बाहरी स्थिति देखकर उनकी सुरक्षा का आकलन नहीं किया जा सकता। समय-समय पर वैज्ञानिक जांच, जड़ों की स्थिति का परीक्षण और निर्माण कार्यों के दौरान पर्याप्त सावधानी बरतना आवश्यक है।