मुंबई में एलपीजी गैस एजेंसी वाले की मनमानी, कालाबाजार में बेच रहे घरेलू गैस सिलेंडर

— कमर्शियल गैस उपभोक्ताओं के साथ 5 केजी बाटला वाले उपभोक्ताओं को भी हो रही भारी परेशानी

— भूखे सो रहे लोग, न घर में बना पा रहे भोजन, न होटल में मिल रहा खाना

मुंबई : अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण भारत में सरकार ने घरेलू गैस में किल्लत नहीं होने देने के लिए कमर्शियल गैस की उपलब्धता पर रोक लगा दी है। इससे संबंधित पत्र भी जारी कर दिया है। हालांकि एजेंसी को कंपनी वाले कुछ कमर्शियल गैस सिलिंडर उपलब्ध करा रहे हैं। लेकिन, मुंबई सहित देश के कई अन्य शहरों में कमर्शियल सिलिंडर नहीं मिलने के कारण होटल, रेस्टोरेंट के साथ-साथ पांच केजी बाटला का उपयोग करने वाले घरेलू एवं छोटे-छोटे ठेला वाले दुकानदारों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और गैस एजेंसी वाले माल बनाने में लगे हैं। एजेंसी वाले घरेलू गैस की कालाबाजारी करने पर उतर आए हैं। एचपीसीएल, बीपीसीएल कंपनी के अधिकारियों, राशनिंग विभाग के अधिकारियों की चुप्पी की वजह से एजेंसी वाले घरेलू गैस सिलिंडर और कमर्शियल गैस सिलिंडर की कालाबाजारी उच्चे दामों में कर रहे हैं। कंपनी के अधिकारी और राशनिंग विभाग के अधिकारियों को इसकी जांच करनी चाहिए कि आखिर कैसे हो रही है गैस की कालाबाजारी।

इधर, पांच किलो बाटला का उपयोग कर घर में खाना बनाने वालों को भी भारी परेशानी हो रही है। इनके घरों में खाना नहीं बन पा रहा है। इस कारण लोग भूखे सो रहे हैं।

एजेंसी वालों का कहना है कि 19 केजी और 5 केजी का कमर्शियल सिलिंडर स्टॉक में नहीं है तो उपभोक्ताओं को कैसे दें। उधर, होटल और रेस्टोरेंट वालों का कहना है कि होटल और रेस्टोरेंट के खाना पर निर्भर रहनेवाले मजदूर और जो घर से बाहर रहकर कमानेवाले लोग हैं, वे तो भूखे रह जा रहे हैं। उन्हें हमलोग खाना उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। ऐसे में मजदूरों के साथ भूखे मरने की नौबत आ गई है।

सरकार द्वारा जारी किए गए पत्र का हिन्दी रूपांतरण पढ़ें- पत्र को आंशिक संशोधित किया गया है।

केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (10 ऑफ 1955) की धारा 3 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए पेट्रोलियम उत्पाद (उत्पादन, भंडारण और आपूर्ति का रखरखाव) आदेश, 1999 जारी किया, ताकि जनजीवन, अर्थव्यवस्था को बनाए रखने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए पेट्रोलियम उत्पादों के उत्पादन, भंडारण और आपूर्ति को विनियमित किया जा सके।
उक्त आदेश के खंड 3 के तहत केंद्र सरकार को यह अधिकार प्राप्त है कि यदि वह संतुष्ट है कि जनहित में ऐसा करना आवश्यक है, तो वह किसी भी तेल शोधन कंपनी को निर्दिष्ट शर्तों के अधीन, ऐसे उत्पाद या मिश्रण के उत्पादन स्तर को बनाए रखने या बनाए रखने का निर्देश दे सकती है।
उक्त आदेश के खंड 5 के तहत केंद्र सरकार को यह अधिकार प्राप्त है कि वह किसी भी तेल विपणन कंपनी को भारत में किसी भी स्थान पर रखे अपने भंडार से किसी भी तेल विपणन कंपनी के प्रतिष्ठानों या डिपो को एक या अधिक पेट्रोलियम उत्पाद, ऐसी मात्रा में और ऐसे तरीके से आपूर्ति करने या आपूर्ति करवाने के लिए बाध्य कर सकती है, जैसा कि उसमें निर्दिष्ट किया गया हो, और इस उद्देश्य के लिए, वह उसी या किसी भिन्न आदेश द्वारा, किसी भी तेल शोधन कंपनी को तेल विपणन कंपनी को ऐसे पेट्रोलियम उत्पाद या उत्पादों को आदेश में निर्दिष्ट अवधि के लिए उपलब्ध कराने के लिए बाध्य कर सकती है।
जबकि द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) एक आवश्यक घरेलू ईंधन है जिसका उपयोग देश भर के घरों में खाना पकाने के लिए किया जाता है और इसकी निर्बाध आपूर्ति जनहित में आवश्यक है;
और जबकि देश में खपत होने वाली घरेलू एलपीजी का 99% से अधिक हिस्सा तीन सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) द्वारा घरों/उपभोक्ताओं को आपूर्ति/विपणन किया जाता है, अर्थात् आईओसीएल, बीपीसीएल, एचपीसीएल;

चूंकि केंद्र सरकार, घरेलू एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, जनहित में एलपीजी उत्पादन के लिए प्रोपेन और ब्यूटेन स्ट्रीम के उपयोग को प्राथमिकता देना आवश्यक समझती है;

चूंकि तेल शोधन कंपनियों को सुनवाई का उचित अवसर दिया गया है और सरकार द्वारा उनके निवेदनों पर विधिवत विचार किया गया है;

अतः, पेट्रोलियम उत्पाद (उत्पादन, भंडारण और आपूर्ति का रखरखाव) आदेश, 1999 के खंड 3 और खंड 5 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 के साथ पढ़ा जाए, केंद्र सरकार द्वारा निम्नलिखित निर्देश देती है:

1. भारत में कार्यरत सभी तेल शोधन कंपनियां यह सुनिश्चित करेंगी कि उनके पास उत्पादित, पुनर्प्राप्त, अंशित या अन्यथा उपलब्ध प्रोपेन और ब्यूटेन स्ट्रीम का अधिकतम उपयोग द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) के उत्पादन के लिए किया जाए और इसे उपलब्ध कराया जाए।

2. सभी तेल शोधन कंपनियां प्रोपेन या ब्यूटेन धाराओं का डायवर्जन, उपयोग, प्रसंस्करण, क्रैकिंग, कन्वेफ्टिंग या किसी अन्य प्रकार से पेट्रोकेमिकल उत्पादों या अन्य ऐसे डाउनस्ट्रीम डेरिवेटिव्स के निर्माण के लिए प्रयोग नहीं करेंगी।

3. सभी सार्वजनिक क्षेत्र की तेल और गैस कंपनियां यह सुनिश्चित करेंगी कि इस प्रकार प्राप्त एलपीजी की आपूर्ति/विपणन केवल घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं को ही किया जाए।

इस आदेश का उल्लंघन करने पर आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 और पेट्रोलियम उत्पाद (उत्पादन, भंडारण और आपूर्ति का रखरखाव) आदेश, 1999 तथा उस समय लागू किसी अन्य कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।

5. यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा और केंद्र सरकार के अगले आदेश तक लागू रहेगा।

नोट : गैस सिलेंडर वाहन की तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक रूप के लिए किया गया है।

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