
घटना के तुरंत बाद पुलिस पहुंची और जांच शुरू कर दी।
फायर ब्रिगेड के जांच में पता चला कि गैस से भरे टैंकर में सिर्फ चालक ही था, जबकि नियमित रूप से सभी भारी वाहनों में चालक का सहायक होना बेहद जरूरी होता है।
इस मामले की जांच आरसीएफ पुलिस और फायर ब्रिगेड के अधिकारी कर रहे हैं।
बताया जाता है कि पार्किंग किसी रसूखदार नेता की है और नेताजी ने आनन-फानन में पूरी पार्किंग खाली करवा दिया।
हादसे के दौरान अगर आग लग जाती तो राजस्थान हादसे की तरह के लोग मौत के मुंह में समा जाते।
ऐसे हादसों को टालने के लिए एलपीजी उत्पादक कंपनियों द्वारा चालकों को सुरक्षा की दृष्टि से चालकों को प्रशिक्षण देने चाहिए।
इधर, एक गाड़ी के चालक का कहना है कि ऐसे मामलों में आरटीओ और ट्रैफिक पुलिस की जिम्मेदारी बनती है कि वे रोड पर चलने वाले सभी भारी वाहनों पर चालक के सहायको को सुनिश्चित करे।