मुंबई : कुर्ला इलाके से पुलिस और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई में व्हेल की उल्टी (एम्बरग्रीस) बरामद की गई है। इसकी अनुमानित कीमत अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में करीब 80 लाख रुपए बताई जा रही है। व्हेल की उल्टी हासिल करना, रखना या बेचना वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत अपराध है। इसी कारण गुजरात निवासी एक युवक को गिरफ्तार किया गया है।
फॉरेस्ट रेंज मुंबई स्पेशल सर्विस में फॉरेस्ट्री कोर्ट केस के तौर पर तैनात महेंद्र गीते (43) ने बताया कि 20 दिसंबर को रात करीब 7 बजे वे नाइट पेट्रोलिंग पर थे। इसी दौरान फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर संतोष डागले का फोन आया। उन्होंने कुर्ला पुलिस स्टेशन में तैनात ऐंटि-टेररिज्म स्क्वॉड के पुलिस सब-इंस्पेक्टर श्रीराम घोलप द्वारा मदद मांगे जाने की जानकारी दी है।
बताया गया कि उनके क्षेत्र में एक व्यक्ति के पास व्हेल की उल्टी जैसे पदार्थ की सूचना मिली है। निर्देश मिलने पर गीते अपनी टीम के साथ कुर्ला पहुंचे, जहां पुलिस ने आरोपी विष्णु भाई राजू भाई मकवाना (28) को हिरासत में लिया हुआ था। आरोपी के पास से बरामद पदार्थ की जांच गर्म लोहे से की गई, जो मोम जैसा भूरा-सफेद निकला। प्रारंभिक जांच में यह एम्बरग्रीस प्रतीत हुआ।
बरामद पदार्थ का कुल वजन 627 ग्राम था। इसमें से 27 ग्राम सैपल केमिकल टेस्टिंग के लिए सुरक्षित रखा गया, जिसे विधिवत सील किया गया। शेष 601 ग्राम अलग से पैक कर सील किया गया। पूरी प्रक्रिया पंचनामा के तहत की गई। पुलिस के अनुसार, 21 दिसंबर की देर रात करीब 2 बजे कुर्ला वेस्ट के एलवीएस मार्ग पर बोहरी कब्रिस्तान गेट के सामने आरोपो एम्बरग्रस की विक्री के इरादे से खड़ा था।
व्हेल मछली की उल्टी को एंबरग्रीस कहा जाता है
व्हेल मछली की उल्टी को एम्बरग्रीस कहा जाता है। यह मुख्य रूप से स्पर्म व्हेल के शरीर में बनती है, जो व्हेल की एक नस्ल है। व्हेल जब स्क्वड जैसे समुद्री जीव खाती है, तो उसकी कठोर चोंच को वह पचा नहीं पाती। इससे बचाव के लिए व्हेल की आंतों में मोम जैसा पदार्थ बनता है, जिसे एम्बरग्रीस भी कहते हैं। कभी-कभी व्हेल इसे उल्टी के रूप में या मल के साथ बाहर निकाल देती है। यह पदार्थ समुद्र में तैरता रहता है। यह बहुत सुगंधित होता है और इससे बहुत महंगे इत्र (परफ्वूम) बनते हैं। इसकी खुशबू लंबे समय तक टिकती है। इसी यजह से यह दुनिया के सबसे कीमती पदार्थों में गिना जाता है।