महाराष्ट्र सरकार ने मान ली मराठा आरक्षण आंदोलन की मांगें

— मराठा आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों को वापस लेने पर भी सहमति बनी

— आंदोलन के दौरान मारे गए लोगों के परिवारों को सरकार ने 15 करोड़ रुपये की सहायता राशि देने की मंजूरी दी

मुंबई/महाराष्ट्र : मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे-पाटिल की मांगें 2 सितम्बर को सरकार ने मान ली। मांगें माने जाने के बाद मनोज जरांगे-पाटिल ने अपना पांच दिन का अनशन समाप्त कर दिया। जल संसाधन मंत्री व मंत्रिमंडलीय उपसमिति अध्यक्ष राधाकृष्ण विखे-पाटिल ने अपने हाथों से नींबू पानी पीलाकर अनशन तुड़वाया। उसके बाद नेता मनोज जरांगे ने कहा कि यह मराठवाड़ा और पश्चिम महाराष्ट्र के लिए ही नहीं बल्कि पूरे राज्य के लिए “स्वर्णिम दिन” है।  

सरकार ने हैदराबाद गजट को तुरंत लागू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत यदि किसी गांव, कुनबी वंश अथवा रिश्तेदार के पास कुनबी प्रमाणपत्र है, तो अन्य मराठाओं को भी प्रमाणपत्र देने की प्रक्रिया शुरू होगी। साथ ही सतारा और आंध गजट पर एक महीने के भीतर कानूनी खामियां दूर कर लागू करने का आश्वासन दिया गया है।
मराठा आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों को वापस लेने पर भी सहमति बनी है। जरांगे ने कहा कि सरकार सितंबर के अंत तक जीआर जारी कर सभी मामले वापस लेगी। आंदोलन के दौरान मारे गए लोगों के परिवारों को मदद और नौकरी की मांग पर सरकार ने 15 करोड़ रुपये की सहायता राशि मंजूर की है, जो एक सप्ताह में पीड़ित परिवारों के खातों में पहुंच जाएगी।
सरकार ने 58 लाख मराठों के कुनबी रेकॉर्ड ग्राम पंचायतों में दर्ज करने, वंशावली समिति के गठन और शिंदे समिति को कार्यालय उपलब्ध कराने पर भी सहमति जताई है।
जरांगे ने कहा कि मराठा-कुनबी एक ही हैं और इस पर सरकार दो माह के भीतर जीआर जारी करेगी। वहीं, 8 लाख रिश्तेदारी से जुड़े दावों की जांच में समय लगेगा, जिसे आंदोलनकारी स्वीकार करते हैं।
मंत्री राधाकृष्ण विखे-पाटिल ने जरांगे-पाटिल को “योद्धा” बताते हुए कहा कि सरकार ने आंदोलनकारियों की सभी जायज मांगों पर गंभीरता से निर्णय लिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अजित पवार समेत सभी मंत्रियों और अधिकारियों का आभार जताया।
–आईएएनएस

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