
घटना गुरुवार दोपहर करीब 2 बजे की है। स्टूडियो में रोजाना बच्चे एक्टिंग क्लास और ऑडिशन के लिए जाते थे। पुलिस ने बताया कि कई टीमें मौके पर पहुंचीं और पहले उस व्यक्ति से बातचीत करने की कोशिश की, जो अपनी मांगों पर अड़ा रहा। इस बीच बीच-बचाव के दौरान पुलिस की एक गोली उसके सीने में लगी। इससे वह जख्मी हो गया। डीसीपी दत्ता नलावडे (ज़ोन 10) ने बताया कि बातचीत विफल होने के बाद पुलिस बच्चों तक पहुंचने के लिए बाथरूम के रास्ते जबरन घुसी थी। घटना के समय जारी एक वीडियो में व्यक्ति ने खुद को रोहित आर्या बताया और कहा कि उसने कुछ खास लोगों से बातचीत करने के लिए एक योजना बनाई थी। उसने कहा कि उसकी मांगें मुख्य रूप से पैसे से जुड़ी नहीं थीं, बल्कि नैतिक और सिद्धांतों से संबंधित थीं।
इधर, रोहित आर्य ने यह कदम क्यों उठाया। इसकी जब पड़ताल की गई तो बात सामने आई कि रोहित ने मेरा स्कूल सुंदर स्कूल की एक परियोजना तैयार की थी। रोहित के अनुसार परियोजना तत्काल शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर को पसंद आई थी। उन्होंने मेरे स्कूल को सुंदर शाला में स्थानांतरित कर दिया और 2 करोड़ रुपए मंजूर किए। इसके तहत काम किया गया, लेकिन उन्होंने रुपए नहीं दिए। इसके पहले पिछले साल 19 अगस्त को रोहित ने तत्कालीन शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर के खिलाफ भूख हड़ताल की थी। उस वक्त 3 अगस्त 2024 को दीपक केसरकर रोहित के घर आए और उन्होंने 5 अगस्त को सब कुछ ठीक करने का वादा किया तो रोहित ने भूख हड़ताल समाप्त कर दी। लेकिन 7 अगस्त को यह स्पष्ट हो गया कि मंत्री के आश्वासन खोखले थे। इसी मुद्दे पर बात करने के लिए बच्चों को बंधक बनाया गया था।