CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनावी प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच की मांग
मुंबई : महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने गुरुवार को भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि आयोग की संवैधानिक स्वायत्तता अब पूरी तरह समाप्त हो चुकी है। उन्होंने हाल में प्रकाशित एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि रिपोर्ट में सामने आई जानकारियां उन आरोपों की पुष्टि करती हैं, जिन्हें महाराष्ट्र में विपक्षी दल लंबे समय से उठाते रहे हैं।
राज ठाकरे ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी अपनी पोस्ट में दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के फैसलों पर आयोग के अन्य दो सदस्यों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—ने कई मौकों पर आपत्तियां दर्ज कीं। *इंडियन एक्सप्रेस* की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने 10 महीनों में आयोग के फैसलों पर 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं।
ठाकरे ने सवाल उठाया कि यदि आयोग के तीन सदस्यों में से दो महत्वपूर्ण फैसलों पर असहमति दर्ज कर रहे थे, तो मतदाता सूची के सॉफ्टवेयर, कानूनी प्रपत्रों में बदलाव और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण निर्देश किस प्रक्रिया के तहत जारी किए गए। उन्होंने पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में दायर अपीलों तथा गोवा में तकनीकी समस्या का भी उल्लेख किया।
मनसे प्रमुख ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग की। साथ ही उन्होंने चुनाव आयोग के फैसलों को प्रभावित करने वाले कथित लोगों की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच कराने तथा भविष्य के चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की जगह पेपर बैलेट के इस्तेमाल की मांग की।
हालांकि, चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों के जवाब में कहा है कि आयुक्तों के बीच अलग-अलग राय, टिप्पणियां और आंतरिक नोट उसकी निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हैं। आयोग के अनुसार, उसके आदेश, सुधार और डिजिटल प्रणालियां कानून, निर्धारित प्रक्रियाओं और सुरक्षा उपायों के अनुरूप हैं तथा अंतिम निर्णय आयोग द्वारा लिए जाते हैं।
इस पूरे विवाद ने चुनाव आयोग की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया, मतदाता सूची में संशोधन और चुनावी पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है।