2007 में खेल मैदान के लिए आरक्षित जमीन पर LPG गोदामों की अनुमति का मामला; MMRDA के अधिकार क्षेत्र के बावजूद पंचायत की भूमिका पर उठे सवाल
महाराष्ट्र/अंजुर। अंजुर ग्राम पंचायत क्षेत्र में खेल मैदान के लिए आरक्षित बताई जा रही जमीन पर एलपीजी गोदामों के निर्माण और संचालन के लिए ग्राम पंचायत की ओर से कथित रूप से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी किए जाने का मामला सामने आया है। इस मामले ने ग्राम पंचायत के अधिकार क्षेत्र और अनुमति देने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, 2007 में खेल मैदान के लिए आरक्षित जमीन के उपयोग से संबंधित मामला है। बताया गया है कि उक्त क्षेत्र मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) के अधिकार क्षेत्र में आता है। इसके बावजूद संबंधित जमीन पर एलपीजी गोदामों के निर्माण/संचालन के लिए ग्राम पंचायत स्तर से NOC दिए जाने की प्रक्रिया अपनाई गई।
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब संबंधित जमीन MMRDA के विशेष नियोजन प्राधिकरण (Special Planning Authority) के अंतर्गत आती है, तो क्या ग्राम पंचायत को अपने स्तर से निर्माण अथवा व्यावसायिक उपयोग के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार था?
खेल मैदान के लिए आरक्षित जमीन के उपयोग पर सवाल
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्ष 2007 में संबंधित जमीन को खेल मैदान के लिए आरक्षित किए जाने की बात सामने आती है। ऐसे में आरक्षित भूमि का उपयोग बदलकर उस पर LPG गोदाम स्थापित करने की अनुमति किस स्तर पर दी गई, इसकी जांच जरूरी बताई जा रही है।
यदि किसी क्षेत्र की भूमि उपयोग विकास योजना में किसी विशेष उद्देश्य के लिए आरक्षित की गई हो, तो उसके विपरीत व्यावसायिक गतिविधि शुरू करने से पहले संबंधित सक्षम प्राधिकरण से आवश्यक अनुमति लेना अनिवार्य होता है। ऐसे में यह जांच का विषय है कि क्या सभी वैधानिक अनुमतियां प्राप्त की गई थीं।
MMRDA के अधिकार क्षेत्र में पंचायत की भूमिका पर सवाल
मामले में MMRDA द्वारा जारी पत्रों का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें संबंधित पक्षों को जमीन के उपयोग और निर्माण से जुड़े नियमों का पालन करने की बात कही गई है। इसके बावजूद ग्राम पंचायत द्वारा LPG गोदामों के संबंध में NOC जारी किए जाने की प्रक्रिया सवालों के घेरे में है।
प्रश्न यह भी है कि क्या ग्राम पंचायत ने NOC जारी करने से पहले MMRDA से लिखित अनुमति अथवा अनापत्ति प्राप्त की थी? यदि अनुमति नहीं ली गई थी, तो पंचायत ने किस अधिकार के तहत NOC जारी किया?
तीन LPG गोदामों को लेकर सामने आए नाम
MMRDA की ओर से संबंधित पक्षों को भेजे गए पत्रों में तीन LPG गोदामों का उल्लेख किए जाने की बात सामने आई है। इनमें—
- अनंत मोराराम भोंईर — भूमि मालिक
- सचिन अनंत भोंईर एवं अन्य — भूमि मालिक
- विमल गैस सर्विसेज — प्रोपराइटर श्रीमती साविता श्रीनिवास सालुंखे एवं अन्य
- विजय गैस सर्विसेज — प्रोपराइटर श्रीमती अंजली श्रीनिवास सालुंखे एवं अन्य
के नामों का उल्लेख बताया गया है।
PESO और अग्निशमन विभाग की अनुमति भी जरूरी
LPG गोदामों के निर्माण एवं संचालन के लिए केवल ग्राम पंचायत का NOC पर्याप्त नहीं माना जा सकता। इसके लिए संबंधित नियमों के अनुसार PESO (Petroleum and Explosives Safety Organisation), अग्निशमन विभाग तथा अन्य सक्षम विभागों की अनुमतियां भी आवश्यक होती हैं।
ऐसे में जांच का विषय यह है कि संबंधित LPG गोदामों के लिए—
- जमीन का उपयोग किस उद्देश्य के लिए आरक्षित था?
- MMRDA की विकास योजना और क्षेत्रीय योजना के अनुरूप भूमि उपयोग की अनुमति थी या नहीं?
- MMRDA से आवश्यक अनुमति प्राप्त की गई थी या नहीं?
- भूमि उपयोग परिवर्तन की अनुमति ली गई थी या नहीं?
- PESO की आवश्यक मंजूरी प्राप्त थी या नहीं?
- अग्निशमन विभाग की अनुमति/अनापत्ति प्रमाण पत्र लिया गया था या नहीं?
- संबंधित जमीन के स्वामित्व और उपयोग से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन किया गया था या नहीं?
PESO की अनुमति के बारे में भी जांच की मांग
LPG एक ज्वलनशील पदार्थ है और इसके भंडारण के लिए निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन आवश्यक है। इसलिए यह भी जांच का विषय है कि संबंधित गोदामों के लिए PESO से लाइसेंस किस आधार पर प्राप्त किया गया और ग्राम पंचायत द्वारा जारी NOC की उसमें क्या भूमिका रही।
यदि ग्राम पंचायत ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर NOC जारी किया है, तो पूरे मामले की प्रशासनिक स्तर पर जांच आवश्यक हो जाती है।
MMRDA से लेकर PESO तक उठ रहे सवाल
मामले में अब सवाल केवल ग्राम पंचायत के NOC तक सीमित नहीं है। MMRDA, PESO, स्थानीय प्रशासन, अग्निशमन विभाग और संबंधित अन्य विभागों की ओर से जारी अनुमतियों और दस्तावेजों की भी जांच किए जाने की जरूरत बताई जा रही है।
विशेष रूप से वर्ष 2007 की विकास योजना, संबंधित जमीन का आरक्षण, भूमि उपयोग, निर्माण अनुमति, ग्राम पंचायत का NOC, MMRDA की अनुमति, PESO लाइसेंस और फायर NOC—इन सभी दस्तावेजों का मिलान किए जाने से ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
सार्वजनिक जमीन के उपयोग को लेकर भी गंभीर सवाल
यदि किसी सार्वजनिक उद्देश्य के लिए आरक्षित जमीन का उपयोग व्यावसायिक गतिविधि के लिए किया गया है, तो मामला और गंभीर हो जाता है। ऐसे में संबंधित अधिकारियों द्वारा यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि जमीन का मूल आरक्षण क्या था और बाद में उसका उपयोग किस प्रक्रिया के तहत बदला गया।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अंजुर ग्राम पंचायत को संबंधित जमीन पर LPG गोदामों के निर्माण अथवा संचालन के लिए NOC जारी करने का वैधानिक अधिकार था? यदि पंचायत के पास ऐसा अधिकार नहीं था, तो NOC जारी करने की पूरी प्रक्रिया की जांच कर जिम्मेदारी तय किए जाने की आवश्यकता है।