न्यायमूर्ति एन. जे. जमादार की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि बेटे का कथित व्यवहार बुजुर्ग पिता के शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जीने के अधिकार को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा था।

अदालत ने कहा कि परिवार के सदस्यों के बीच संपत्ति को लेकर विवाद होना असामान्य नहीं है, लेकिन इस तरह का विवाद किसी भी परिस्थिति में बुजुर्ग व्यक्ति के साथ मारपीट, उत्पीड़न या दुर्व्यवहार का आधार नहीं बन सकता।
सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले से जुड़े सीसीटीवी फुटेज का भी उल्लेख किया। न्यायमूर्ति जमादार ने फुटेज में दिखाई देने वाले दृश्यों को बेहद परेशान करने वाला बताया। अदालत ने माना कि उपलब्ध परिस्थितियां बुजुर्ग पिता के साथ कथित दुर्व्यवहार की गंभीरता को दर्शाती हैं।
हाईकोर्ट ने निचली अथवा संबंधित प्राधिकरण द्वारा बेटे को पिता के घर से बाहर करने के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए बुजुर्गों के सम्मान और सुरक्षा के अधिकार को महत्वपूर्ण बताया।
अदालत की इस टिप्पणी को बुजुर्ग नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिहाज से अहम माना जा रहा है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट संदेश दिया कि संपत्ति संबंधी पारिवारिक विवादों की आड़ में बुजुर्ग माता-पिता के साथ दुर्व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा।