नई दिल्ली : NEET-UG 2026 परीक्षा में सामने आई गंभीर अनियमितताओं की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित अपने त्यागपत्र में कहा कि देश के करोड़ों छात्रों का विश्वास और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता सर्वोपरि है। ऐसे में नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद पर बने रहना उचित नहीं होगा।

अपने त्यागपत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता, गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का हरसंभव प्रयास किया, लेकिन NEET-UG 2026 परीक्षा में हुई अनियमितताओं से छात्रों, अभिभावकों और पूरे देश की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने लिखा कि शिक्षा व्यवस्था में जनता का विश्वास बनाए रखना सरकार और शिक्षा मंत्रालय की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
गौरतलब है कि 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा के बाद प्रश्नपत्र लीक, परीक्षा केंद्रों पर गड़बड़ियों तथा अन्य अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे। देश के विभिन्न राज्यों से शिकायतें मिलने के बाद केंद्र सरकार ने पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी थी। जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने के बाद सरकार ने परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया।
इसके बाद 21 जून 2026 को देशभर में कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बीच NEET-UG की पुनर्परीक्षा आयोजित की गई, जिसमें 20 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया। परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था को पहले की तुलना में अधिक मजबूत बनाया गया तथा डिजिटल निगरानी, बायोमेट्रिक सत्यापन और अन्य तकनीकी उपायों का उपयोग किया गया ताकि परीक्षा निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से संपन्न हो सके।
सरकार ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कई महत्वपूर्ण सुधारों की भी घोषणा की है। सबसे बड़ा निर्णय यह लिया गया है कि अगले वर्ष से NEET-UG परीक्षा कंप्यूटर आधारित (CBT) मोड में आयोजित की जाएगी। सरकार का मानना है कि ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली अपनाने से प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा और परीक्षा प्रक्रिया अधिक सुरक्षित, पारदर्शी एवं विश्वसनीय बनेगी।
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, परीक्षा प्रणाली में तकनीकी सुधारों के साथ-साथ राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली की भी व्यापक समीक्षा की जा रही है। परीक्षा संचालन, निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर कई नए प्रावधान लागू किए जाएंगे।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसे सरकार की ओर से जवाबदेही और नैतिक उत्तरदायित्व का संदेश देने वाला कदम बताया जा रहा है। वहीं विपक्ष ने इस घटनाक्रम को शिक्षा व्यवस्था की विफलता बताते हुए परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग दोहराई है।
देशभर के लाखों छात्र और अभिभावक अब उम्मीद कर रहे हैं कि नई व्यवस्था के तहत भविष्य की परीक्षाएं पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और तकनीक आधारित होंगी, जिससे प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता और छात्रों का भरोसा फिर से मजबूत हो सके।