
मुख्यमंत्री के अनुसार, इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य मुंबई के 370 जलभराव वाले संवेदनशील स्थानों (फ्लड हॉटस्पॉट) की समस्या का स्थायी समाधान करना है। इसके तहत पुराने और कम क्षमता वाले स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा, बड़े नालों का चौड़ीकरण होगा, नई जलनिकासी लाइनें बिछाई जाएंगी तथा अत्याधुनिक पंपिंग स्टेशन और बाढ़ प्रबंधन प्रणाली विकसित की जाएगी।
सरकार का कहना है कि यह योजना केवल जलभराव कम करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित निगरानी, रियल-टाइम बाढ़ पूर्वानुमान, बेहतर आपदा प्रबंधन, परिवहन और शहरी बुनियादी ढांचे को भी मजबूत करेगी। इसे मुंबई और मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) के दीर्घकालिक विकास की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार से स्वीकृति मिलने के बाद योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। उनका दावा है कि इसके पूरा होने पर मानसून के दौरान मुंबई में होने वाले जलभराव, यातायात बाधित होने और जनजीवन पर पड़ने वाले असर में उल्लेखनीय कमी आएगी।
मुंबई को बाढ़मुक्त बनाने के लिए 13,000 करोड़ रुपए की एकीकृत योजना का केंद्र को भेजा गया प्रस्ताव
मुंबई : मुंबई में हर वर्ष मानसून के दौरान होने वाले जलभराव की समस्या से स्थायी राहत दिलाने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने 13,000 करोड़ रुपए की एकीकृत बाढ़ नियंत्रण (Integrated Flood Control) योजना तैयार कर केंद्र सरकार को मंजूरी के लिए भेज दी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में इसकी जानकारी देते हुए कहा कि यह योजना शहर के जलनिकासी तंत्र को आधुनिक बनाकर मुंबई को बाढ़ के खतरे से काफी हद तक सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम होगी।