
पुलिस के अनुसार, इस मामले में परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र तक पहुंच हासिल करने और उसे आगे साझा करने का आरोप है। जांच के दौरान पेपर लीक से जुड़े नेटवर्क का पता चला, जिसके बाद क्राइम ब्रांच ने आरोपियों को गिरफ्तार किया। मामले में एक निजी कोचिंग संस्थान से जुड़े व्यक्ति और अभ्यर्थियों से जुड़े लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
यह परीक्षा 22 मार्च 2026 को आयोजित की गई थी। बाद में अभ्यर्थियों की शिकायतों और प्रारंभिक जांच में अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद MPSC ने पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द कर दी और नए सिरे से परीक्षा कराने का फैसला किया।
मामले में पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि प्रश्नपत्र किस स्तर पर लीक हुआ, किन लोगों तक पहुंचा और इससे कितने अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ मिला। गिरफ्तार आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां उन्हें पुलिस हिरासत में भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।