महाराष्ट्र में दावे-आपत्तियां दर्ज कराने की समय-सीमा 12 नवंबर तक बढ़ी, BLO घर जाकर जुटाएंगे दस्तावेज
मुंबई: चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची के चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच आयोग ने शनिवार को अहम बैठक कर प्रक्रिया में कई राहत देने वाले फैसले किए। बैठक में नोटिस पाने वाले मतदाताओं को व्यक्तिगत रूप से निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) के कार्यालय में उपस्थित होने की बाध्यता को अधिकांश मामलों में समाप्त कर दिया गया है। अब बूथ लेवल अधिकारी (BLO) ऐसे मतदाताओं के घर जाकर आवश्यक दस्तावेज जुटाएंगे और उन्हें ECINET प्रणाली पर अपलोड करेंगे।
आयोग के अनुसार, केवल असाधारण परिस्थितियों में ही मतदाता को सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा। जरूरत पड़ने पर सुनवाई ऑनलाइन भी कराई जा सकेगी। इसके अलावा, आर्थिक रूप से कमजोर, बेघर और अन्य जरूरतमंद मतदाताओं की सहायता के लिए हेल्प डेस्क और विशेष शिविर लगाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
बैठक में महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तारीख बढ़ाकर 12 नवंबर कर दी गई है। दिल्ली में भी यह समय-सीमा 30 अक्टूबर तक बढ़ाई गई है। नोटिस, दावे और आपत्तियों के निपटारे के लिए भी अलग समय-सीमा तय की गई है।
SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की ओर से चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं, आयोग ने शनिवार को स्पष्ट किया कि SIR से जुड़े फैसले आयोग के सभी सदस्यों की सहमति से लिए गए हैं। आयोग ने यह भी कहा कि प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना है और पात्र मतदाताओं को नाम शामिल कराने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन करने का अवसर उपलब्ध रहेगा।
आयोग ने ECINET प्रणाली की भी समीक्षा कराने का फैसला किया है। इसके लिए वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त की अध्यक्षता में एक समिति गठित की जाएगी, जिसमें IIT या IIIT के एक स्वतंत्र विशेषज्ञ को भी शामिल किया जाएगा। समिति प्रणाली की कार्यप्रणाली और संबंधित कानूनों व नियमों के अनुपालन की समीक्षा कर अपनी रिपोर्ट आयोग को सौंपेगी।